Thursday, 1 November 2018

राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन और यूएन हैबिटेट ने विश्‍व शहर दिवस 2018 के अवसर पर ‘अर्बन कैफे: रिवर फॉर हैबिटेट’ पर नीति वार्ता का आयोजन किया

राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन ने यू.एन. (हैबिटेट) के साथ भागीदारी में कल विश्‍व शहर दिवस, 2018 के अवसर पर नई दिल्‍ली में अर्बन कैफे: रिवर फॉर हैबिटेट’ पर नीति वार्ता का आयोजन किया। इस क्षेत्र के विशेषज्ञ मानव सभ्‍यता- हमारे शहर, हमारी अर्थव्‍यवस्‍था,  हमारे दैनिक जीवन के विभिन्‍न पहलुओं के नदियों से गहरे संबंधों तथा स्‍वस्‍थ नदी पारिस्थितिकी के रखरखाव की चुनौतियों और इनसे निपटने के तरीकों के बारे में विचार-विमर्श करने के लिए एकत्र हुए।
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव श्री यू. पी. सिंह ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आधुनिक समय में लोगों के नदियों के साथ कमजोर हो रहे संबंधों और अधिकांश नदियों की बुरी स्थिति के बारे में चिंता जाहिर की। उन्‍होंने कहा कि गैर उपचारित औद्योगिक अपशिष्‍ट को नदियों में बहने की अनुम‍ति नहीं दी जानी चाहिए। बाढ़ आने वाले मैदानों में ठोस अपशिष्‍ट नहीं डाले जानी चाहिए। कृषि में जल उपयोग की दक्षता बढ़ाने और भू-जल के निष्‍कासन को कम करने पर ध्‍यान दिया जाना चाहिए। इससे नदियों का स्‍वास्‍थ्‍य बेहतर करने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर स्‍वच्‍छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री राजीव रंजन मिश्रा ने गंगा की सफाई के लिए उनके संगठन द्वारा किए जा रहे उपायों के बारे में जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि आज हम शहरीकरण के साथ-साथ नदियों की चुनौती का भी सामना कर रहे हैं। गंगा की मुख्‍य धारा में किए गए सर्वेक्षण में इस नदी में सीवेज/औद्योगिक प्रदूषण फैलाने में योगदान देने वाले 97 शहरों की पहचान की गई है। इन मुद्दों से निपटने के लिए राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन द्वारा किए गए उपायों के बारे में जानकारी देते हुए उन्‍होंने कहा कि एक शहर, एक ऑपरेटर, हाइब्रिड एन्‍युइटी मॉडल, सीवरेज बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के 15 वर्षीय परिचालन और रखरखाव शुरू किए गए हैं। उन्‍होंने 07 आईआईटी के कन्‍सोर्टियम द्वारा विकसित शहरी नदी प्रबंधन योजना के बारे में जानकारी देते हुए इस बात पर जोर दिया कि लोगों और नदियों के मध्‍य जुड़ाव बहुत आवश्‍यक है क्‍योंकि नदियों के स्‍वास्‍थ्‍य की निगरानी करने के लिए हितधारकों के रूप में समुदाय को शामिल करने की जरूरत है। उन्‍होंने इस संबंध में जिन महत्‍वपूर्ण मु्द्दों की ओर इशारा किया है जिनमें बाढ़ मैदानों के अतिक्रमणों का प्रबंधन, शहर निर्दिष्‍ट शहरी प्रबंधन योजनाओं को विकसित करना, आर्थिक रूप में नदी सेवाओं का मूल्‍यांकन, गंगा में जैव विविधता को संरक्षित करना, भू-जल रिचार्ज को बनाए रखना, सभी हितधारकों के साथ स्‍वच्‍छ गंगा मिशन का सहयोग और समन्‍वय तथा जन भागीदारी शामिल हैं।
वित्‍त मंत्रालय की आर्थिक मामलों के विभाग के मुख्‍य आर्थिक सलाहकार श्री संजीव सान्याल ने कहा कि बाढ़ के मैदानों की रक्षा के लिए हमें उनके आस-पास रहने वाले लोगों के साथ जुड़ाव कायम करके इनके उपयोग के लिए पर्यावरण रूप से संवेदनशील तरीकों का पता लगाने की जरूरत है।
संयुक्‍त राष्‍ट्र आवासीय समन्‍वयक और भारत में यूएनडीपी प्रतिनिधि श्री यूरी अफनासेव ने कहा कि इस देश के लिए इस शताब्‍दी में पानी की कीमत इसी तरह है जैसे बीसवीं शताब्‍दी में तेल की थी। पूरी दुनिया में हमारे पूर्वजों ने नील, डेन्‍यूब, राइन, वोल्‍गा और गंगा का मां के रूप में उल्‍लेख किया है। राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन के एकीकृत दृष्टिकोण का भारत के अन्‍य न‍दी प्रबंधन प्राधिकरणों द्वारा भी अनुपालन किए जाने की जरूरत है। यूएन हैबिटेट इंडिया के कंट्री मैनेजर श्री हितेश वैद्य ने उद्घाटन सत्र में कहा कि हमें चुनौतियों को समाधान में और समाधानों को अवसरों में बदलने के तरीकों का पता लगाना चाहिए।
पैनलिस्टों ने नदी और अर्थव्यवस्था के बीच महत्‍वपूर्ण संबंधों के बारे में जोर दिया। नदी और नदियों के बेसिनों को राष्‍ट्रीय पूंजी या परिसंपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्‍होंने नदियां जहां शहरों में  प्रवेश करती हैं और बाहर निकलती हैं वहां शहरी नदी योजना विकसित करने पर जोर दिया। घाटों के महत्‍व पर जोर देते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि घाट न केवल जनता को नदी से जोड़ते हैं बल्कि लोगों की सुरक्षा को भी बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञों ने हमारी नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण तत्वों के रूप में जन भागीदारी पर जोर दिया।

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